राजनीति

दो बच्चों का नियम: सुप्रीम कोर्ट ने 2003 का जावेद फैसला बड़ी बेंच को भेजा

पंचायत चुनाव में दो से ज़्यादा बच्चों वालों को अयोग्य ठहराने वाले नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के जावेद फैसले को दोबारा विचार के लिए बड़ी बेंच को भेजा है।

स्थानीय निकाय चुनावों में लागू दो बच्चों का नियम एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की कसौटी पर है। 4 नवंबर 2026 को दिए फैसले में अदालत ने कहा कि घटती प्रजनन दर के बीच ऐसे कानूनों की प्रासंगिकता कम हुई है, और 2003 के चर्चित जावेद बनाम हरियाणा फैसले को दोबारा विचार के लिए बड़ी बेंच को भेज दिया।

मुख्य बातें

  • जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने 4 नवंबर 2026 को फैसला सुनाया।
  • 2003 के जावेद बनाम हरियाणा फैसले का आधार बड़ी बेंच के पास पुनर्विचार के लिए भेजा गया।
  • अदालत ने किसी कानून को रद्द नहीं किया, महाराष्ट्र का अयोग्यता प्रावधान अभी लागू रहेगा।
  • देश की कुल प्रजनन दर 1971 के करीब 5.2 से घटकर 2024 में 1.9 पर आ गई है।

यह मामला महाराष्ट्र की एक सरपंच से जुड़ा है, जिनका चुनाव तीसरे बच्चे के कारण हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी अपील पर सुनवाई करते हुए पूरे नियम के पीछे की सोच पर सवाल उठाए।

Into Legal World की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने माना कि जो कानून बनते समय तर्कसंगत था, समय बदलने के साथ उसका आधार कमज़ोर पड़ सकता है। इसी कारण अब बड़ी बेंच तय करेगी कि 23 साल पुराना फैसला आज भी सही है या नहीं।

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क्या है पूरा मामला?

मामला मंगला भीमराव इंगले से जुड़ा है, जो 2022 में महाराष्ट्र के अमरावती संभाग की काकोडा ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गई थीं। उनके तीसरे बच्चे का जन्म 2014 में हुआ था।

महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(j-1) के तहत दो से ज़्यादा बच्चों वाला व्यक्ति पंचायत चुनाव के लिए अयोग्य माना जाता है। इसी प्रावधान के आधार पर हाई कोर्ट ने उनका चुनाव रद्द कर दिया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को अदालत में चुनौती नहीं दी गई थी।

दो बच्चों का नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि दो से ज़्यादा बच्चों पर दंड देने वाले कानूनों ने अपनी प्रासंगिकता खो दी है, क्योंकि जनसंख्या वृद्धि को लेकर जो चिंता उस समय थी, वह अब बदल चुकी है। बेंच के अनुसार जावेद फैसला जिन मान्यताओं पर टिका था, वे गलत साबित हुई हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी अयोग्यता नागरिकों के एक वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व से बाहर कर देती है और अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन संबंधी स्वायत्तता पर असर डालती है। फैसले में कहा गया कि अदालत को बदलते समय के साथ चलना होगा और बेजान पड़ चुकी सोच के सहारे आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

प्रजनन दर के आंकड़े क्या बताते हैं?

फैसले में जिन आंकड़ों का हवाला दिया गया, वे बताते हैं कि भारत अब प्रतिस्थापन स्तर से नीचे पहुंच चुका है। नीचे दी गई तालिका में मुख्य आंकड़े हैं:

संकेतक आंकड़ा
कुल प्रजनन दर, 1971 करीब 5.2
कुल प्रजनन दर, 2024 (SRS) 1.9
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण का अनुमान करीब 2.0
प्रतिस्थापन स्तर 2.1
60 साल से ज़्यादा उम्र की आबादी 2014 में करीब 8.3%, 2024 में 9.7%
2036 तक बुज़ुर्ग आबादी का अनुमान करीब 15%

इन आंकड़ों से साफ है कि जिस तेज़ जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए यह शर्त लाई गई थी, वह स्थिति अब नहीं रही। उलटे, बुज़ुर्ग आबादी का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है।

आगे क्या होगा?

अब सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री यह फैसला मुख्य न्यायाधीश के सामने रखेगी, ताकि बड़ी बेंच का गठन हो सके। वही बेंच तय करेगी कि जावेद फैसले का आधार बना रहेगा या बदलेगा।

तब तक हाई कोर्ट के फैसले पर लगी रोक जारी रहेगी, इसलिए मंगला इंगले अपील का निपटारा होने तक सरपंच बनी रहेंगी। ग्रामीण स्तर पर विकास योजनाओं में पंचायतों की भूमिका बढ़ रही है, जैसा हाल में मंजूर हुई विकसित ग्राम स्वराज योजना में भी दिखता है, इसलिए यह सवाल और अहम हो जाता है कि पंचायत चुनाव कौन लड़ सकता है।

आपके लिए इसका क्या मतलब है

फिलहाल किसी भी राज्य का दो बच्चों वाला नियम खत्म नहीं हुआ है। जो लोग अगले स्थानीय निकाय चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्हें अपने राज्य का मौजूदा कानून ही मानना होगा, जब तक बड़ी बेंच का फैसला नहीं आता।

  • महाराष्ट्र में अयोग्यता प्रावधान अभी लागू है।
  • बड़ी बेंच का फैसला कई राज्यों के ऐसे नियमों पर असर डाल सकता है।
  • चुनाव लड़ने से पहले राज्य चुनाव आयोग के नियम ज़रूर जांचें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सुप्रीम कोर्ट ने दो बच्चों का नियम खत्म कर दिया है?

नहीं। अदालत ने किसी कानून को रद्द नहीं किया है। उसने 2003 के जावेद बनाम हरियाणा फैसले को दोबारा विचार के लिए बड़ी बेंच को भेजा है। तब तक राज्यों के मौजूदा नियम लागू रहेंगे।

जावेद बनाम हरियाणा फैसला क्या है?

2003 के इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव में दो से ज़्यादा बच्चों वाले लोगों को अयोग्य ठहराने वाले हरियाणा के नियम को सही माना था। अब इसी फैसले के आधार पर बड़ी बेंच पुनर्विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला बड़ी बेंच को क्यों भेजा?

अदालत के अनुसार प्रजनन दर 1971 के करीब 5.2 से घटकर 2024 में 1.9 हो गई है। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण का पुराना तर्क कमज़ोर हुआ है और नियम नागरिकों के प्रतिनिधित्व के अधिकार पर असर डालता है।

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Akshay

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