क्रिटिकल मिनरल योजना को केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार, 4 नवंबर को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी दो योजनाओं पर कुल ₹17,314 करोड़ खर्च करने का फैसला हुआ। इसका मकसद बिजली भंडारण क्षमता बढ़ाना और लिथियम, निकेल जैसे खनिजों के लिए आयात पर निर्भरता घटाना है।
मुख्य बातें
- दो योजनाओं पर कुल ₹17,314 करोड़ खर्च होंगे।
- ऊर्जा भंडारण योजना के लिए ₹14,500 करोड़, जिससे 92 GWh ग्रिड स्तर की स्टोरेज क्षमता को सहारा मिलेगा।
- क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना पर ₹2,814 करोड़, लिथियम और निकेल के 4 प्लांट लगेंगे।
- प्लांट लगाने वाली कंपनियों को योग्य निवेश पर अधिकतम 30% पूंजीगत सब्सिडी मिलेगी।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को इन फैसलों की जानकारी दी। दोनों योजनाएं सीधे तौर पर बिजली, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों से जुड़ी हैं।
इसी बैठक में सरकार ने अग्निवीरों और सांख्यिकी प्रणाली से जुड़े फैसले भी लिए। लेकिन कारोबार और उद्योग जगत की नज़र सबसे ज़्यादा इन ऊर्जा योजनाओं पर है, क्योंकि इनसे घरेलू निवेश और सप्लाई चेन दोनों पर असर पड़ेगा।
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क्या है क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना?
यह योजना देश में लिथियम और निकेल की प्रोसेसिंग यानी शोधन के प्लांट लगाने के लिए है। इसका आधिकारिक नाम क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए कैपेक्स सपोर्ट स्कीम है।
योजना पर ₹2,814 करोड़ खर्च होंगे और यह पांच साल, यानी वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी। इसके तहत कुल 4 प्लांट लगेंगे, जिनमें 2 लिथियम और 2 निकेल के होंगे। निकेल की प्रोसेसिंग के दौरान सह-उत्पाद के रूप में कोबाल्ट मिलने की भी उम्मीद है।
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| कुल बजट | ₹2,814 करोड़ |
| अवधि | 2026-27 से 2030-31 |
| प्लांट | 2 लिथियम, 2 निकेल |
| न्यूनतम क्षमता | लिथियम प्लांट 30 हज़ार टन, निकेल प्लांट 50 हज़ार टन |
| सब्सिडी | योग्य निवेश का अधिकतम 30% |
कंपनियों का चयन कैसे होगा?
कंपनियों का चयन दो चरणों में होगा। पहले तकनीकी पात्रता जांची जाएगी, फिर वित्तीय बोली लगेगी। हर खनिज के लिए दो लाभार्थी चुने जाएंगे।
आज तक के अनुसार, जो कंपनी सबसे कम पूंजी सहायता मांगेगी, उसे प्राथमिकता मिलेगी। सरकारी सहायता की अधिकतम सीमा लिथियम के लिए ₹500 करोड़ और निकेल के लिए ₹900 करोड़ बताई गई है। यह रकम तीन किस्तों में, प्रोजेक्ट के तय पड़ाव पूरे होने पर दी जाएगी।
ऊर्जा भंडारण योजना से क्या बदलेगा?
ऊर्जा भंडारण योजना पर ₹14,500 करोड़ खर्च होंगे। इसके तहत वायबिलिटी गैप फंडिंग दी जाएगी, ताकि 92 GWh की ग्रिड स्तर की भंडारण क्षमता तैयार हो सके।
- बैटरी स्टोरेज: 30 GWh
- पंप्ड स्टोरेज: 60 GWh
- शेष क्षमता नई उभरती भंडारण तकनीकों के लिए
सौर और पवन ऊर्जा हर समय एक जैसी नहीं मिलती। भंडारण से दिन में बनी अतिरिक्त बिजली रात या ज़्यादा मांग के समय इस्तेमाल हो सकेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह योजना 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य में मदद करेगी।
चीन पर निर्भरता का सवाल क्यों अहम है?
बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों में लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे खनिज ज़रूरी हैं। भारत अभी शोधित खनिजों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के हवाले से बताया गया है कि रेयर अर्थ और बैटरी ग्रेड ग्रेफाइट की वैश्विक रिफाइनिंग में चीन की हिस्सेदारी 90% से ज़्यादा है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि भारत को क्रिटिकल मिनरल की प्रोसेसिंग के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
आपके लिए इसका क्या मतलब है
ये योजनाएं लंबी अवधि की हैं, इसलिए इनका सीधा असर तुरंत आम लोगों की जेब पर नहीं दिखेगा। आगे चलकर घरेलू प्रोसेसिंग और बेहतर भंडारण से बिजली आपूर्ति ज़्यादा भरोसेमंद हो सकती है।
- शेयर बाज़ार के निवेशक खनन और बैटरी से जुड़ी कंपनियों पर नज़र रखें, जैसे हाल के शेयर बाज़ार में आई तेज़ी के दौर में दिखा।
- ईवी और सोलर सेक्टर में नए प्लांट से रोज़गार के मौके बन सकते हैं, जैसा राज्यों की बिहार MSME नीति जैसी पहल में भी लक्ष्य रखा गया है।
- इसी कैबिनेट बैठक में अग्निवीरों के सेवा विस्तार का फैसला भी हुआ, जिसकी पूरी जानकारी अलग से पढ़ी जा सकती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्रिटिकल मिनरल योजना का बजट कितना है?
केंद्रीय कैबिनेट ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना के लिए ₹2,814 करोड़ मंजूर किए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल चलेगी और इसके तहत लिथियम व निकेल के कुल 4 प्लांट लगेंगे।
कंपनियों को कितनी सब्सिडी मिलेगी?
चुनी गई कंपनियों को योग्य निवेश का अधिकतम 30% पूंजीगत सब्सिडी के रूप में मिलेगा। सहायता की अधिकतम सीमा लिथियम के लिए ₹500 करोड़ और निकेल के लिए ₹900 करोड़ बताई गई है, जो तीन किस्तों में दी जाएगी।
ऊर्जा भंडारण योजना में कितनी क्षमता का लक्ष्य है?
ऊर्जा भंडारण योजना पर ₹14,500 करोड़ खर्च होंगे। इससे 92 GWh ग्रिड स्तर की भंडारण क्षमता को वायबिलिटी गैप फंडिंग मिलेगी, जिसमें 30 GWh बैटरी स्टोरेज और 60 GWh पंप्ड स्टोरेज शामिल है।
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