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2025 में शिप रिसाइक्लिंग में भारत बना दुनिया का नंबर-1 देश, वैश्विक हिस्सेदारी 35.4%

2025 में भारत ने शिप रिसाइक्लिंग में दुनिया में पहला स्थान हासिल किया और उसकी वैश्विक हिस्सेदारी 35.4% तक पहुंच गई। गुजरात का अलंग-सोसिया क्लस्टर इस उपलब्धि का मुख्य केंद्र रहा।

फ़ाइल फ़ोटो: अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड
फ़ाइल फ़ोटो: अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड  फ़ोटो: Neilsatyam / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

2025 में शिप रिसाइक्लिंग के क्षेत्र में भारत ने दुनिया में पहला स्थान प्राप्त किया। देश की वैश्विक हिस्सेदारी 35.4% तक पहुंच गई, जिससे भारत ने इस क्षेत्र में आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की। यह उपलब्धि भारत की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को दर्शाती है।

मुख्य बातें

  • 2025 में भारत की शिप रिसाइक्लिंग वैश्विक हिस्सेदारी 35.4% रही
  • गुजरात के अलंग-सोसिया क्लस्टर का 98% योगदान
  • रिसाइक्लिंग क्षमता 2.99 मिलियन ग्रॉस टन तक पहुंची

भारत ने 2025 में 2.99 मिलियन ग्रॉस टन (GT) जहाज रिसाइक्लिंग की, जो 2024 की तुलना में लगभग 60% अधिक है। गुजरात का अलंग-सोसिया क्लस्टर, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा शिप रिसाइक्लिंग केंद्र माना जाता है, इस उपलब्धि की रीढ़ है।

सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, भारत ने Maritime India Vision 2030 के तहत निर्धारित लक्ष्य पांच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया है। DD News की रिपोर्ट के मुताबिक, यह उपलब्धि भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाती है।

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सांकेतिक तस्वीर: जहाजों के साथ एक शिपयार्ड का हवाई दृश्य
सांकेतिक तस्वीर: जहाजों के साथ एक शिपयार्ड का हवाई दृश्य फ़ोटो: Pexels

शिप रिसाइक्लिंग में भारत नंबर-1 कैसे बना?

भारत ने शिप रिसाइक्लिंग में नंबर-1 स्थान 2025 में प्राप्त किया। इसकी प्रमुख वजह गुजरात के अलंग-सोसिया क्लस्टर की विशाल क्षमता और आधुनिकीकरण है।

2024 में भारत की हिस्सेदारी 30.1% थी, जो 2025 में बढ़कर 35.4% हो गई। अलंग-सोसिया क्लस्टर देश की लगभग 98% जहाज रिसाइक्लिंग गतिविधियों का केंद्र है। यहां हर वर्ष लगभग 3.50 मिलियन मीट्रिक टन स्टील का उत्पादन होता है।

गुजरात के अलंग-सोसिया क्लस्टर की क्या भूमिका रही?

अलंग-सोसिया क्लस्टर भारत की शिप रिसाइक्लिंग सफलता का मुख्य केंद्र है। इसकी वार्षिक क्षमता लगभग 60 लाख ग्रॉस टन है।

यहां आधुनिकीकरण, श्रमिकों का प्रशिक्षण, स्टील री-रोलिंग मिलें और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। पिछले वर्षों में क्लस्टर का व्यापक विकास हुआ, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना।

सरकार की योजनाएं और भविष्य का लक्ष्य क्या है?

सरकार ने Maritime India Vision 2030 के तहत शिप रिसाइक्लिंग में अग्रणी बनने का लक्ष्य रखा था, जो समय से पहले हासिल हो गया। अब भारत अपनी क्षमता को लगभग दोगुना कर 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन तक ले जाने की योजना बना रहा है।

इसके लिए अलंग यार्ड का विस्तार और आधुनिकीकरण किया जाएगा। साथ ही, श्रमिकों के लिए सेफ्टी ट्रेनिंग और वेलफेयर पर भी जोर दिया जा रहा है।

शिप रिसाइक्लिंग में भारत की यह उपलब्धि आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह उपलब्धि भारत के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से अहम है।

  • रिसाइक्लिंग से देश में स्टील उत्पादन बढ़ता है, जिससे निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों को लाभ मिलता है।
  • अधिक रोजगार के अवसर सृजित होते हैं, विशेषकर गुजरात जैसे राज्यों में।
  • पर्यावरण के लिए सुरक्षित प्रक्रियाओं को अपनाया जा रहा है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलती है।

अगर आप भारत की आर्थिक खबरों में रुचि रखते हैं, तो IMF की ताजा वैश्विक विकास रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं। इसी तरह, दुनिया में चल रहे प्रमुख संकट पर हमारी विश्लेषण रिपोर्ट भी उपयोगी हो सकती है।

आपके लिए इसका क्या मतलब है

शिप रिसाइक्लिंग में भारत के नंबर-1 बनने से देश में स्टील के दाम स्थिर रहने, रोजगार के नए अवसर बनने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ने की संभावना है। यदि आप उद्योग, निर्माण या पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े हैं, तो यह खबर आपके लिए सकारात्मक संकेत है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भारत ने शिप रिसाइक्लिंग में नंबर-1 स्थान कब और कैसे हासिल किया?

भारत ने 2025 में शिप रिसाइक्लिंग के क्षेत्र में वैश्विक हिस्सेदारी 35.4% तक पहुंचाकर नंबर-1 स्थान प्राप्त किया। इसका मुख्य श्रेय गुजरात के अलंग-सोसिया क्लस्टर की आधुनिक सुविधाओं और क्षमता को जाता है।

शिप रिसाइक्लिंग से भारत को क्या आर्थिक लाभ मिलता है?

शिप रिसाइक्लिंग से भारत में स्टील उत्पादन बढ़ता है, जिससे निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के क्षेत्र में लाभ मिलता है। साथ ही, विदेशी मुद्रा अर्जन और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

अलंग-सोसिया क्लस्टर क्यों इतना महत्वपूर्ण है?

अलंग-सोसिया क्लस्टर भारत की शिप रिसाइक्लिंग गतिविधियों का लगभग 98% केंद्रित करता है। इसकी विशाल क्षमता, आधुनिक यार्ड और प्रशिक्षित श्रमिक इस क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रखते हैं।

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Akshay

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