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भारत में बाढ़ और सूखे का खतरा एक साथ बढ़ा, IIT रुड़की के अध्ययन में कई राज्यों की चिंता उजागर

IIT रुड़की के अध्ययन के अनुसार भारत के कई जिलों में बाढ़ और सूखे का खतरा एक साथ बढ़ रहा है। यह रिपोर्ट आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत में बाढ़ और सूखे का बढ़ा खतरा, कई जिले दोनों आपदाओं के लिए संवेदनशील, IIT रुड़की का अध्ययन
भारत में बाढ़ और सूखे का बढ़ा खतरा, कई जिले दोनों आपदाओं के लिए संवेदनशील, IIT रुड़की का अध्ययन  फ़ोटो: ETV Bharat

भारत के कई हिस्सों में बाढ़ और सूखे जैसी दो विपरीत प्राकृतिक आपदाओं का खतरा एक साथ बढ़ रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के ताजा अध्ययन के अनुसार, देश के कई जिलों में अब दोनों आपदाओं का जोखिम पहले से अधिक हो गया है, जिससे आपदा प्रबंधन और नीतिगत तैयारी की आवश्यकता बढ़ गई है।

मुख्य बातें

  • IIT रुड़की के अध्ययन में 591 जिलों का विश्लेषण किया गया
  • उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल सबसे अधिक संवेदनशील राज्यों में शामिल
  • बाढ़ और सूखे दोनों का खतरा अब एक साथ बढ़ रहा है
  • पूर्वी और उत्तरी भारत में बहु-आपदा हॉटस्पॉट की संख्या बढ़ी

अध्ययन के अनुसार, अब देश के दस में से एक से अधिक जिले ऐसे हैं, जो बाढ़ और सूखे दोनों के उच्च जोखिम वाले क्षेत्र माने जा रहे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के कई जिले इन दोनों प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए हैं।

यह रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन की रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे पता चलता है कि किन जिलों में एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

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सांकेतिक तस्वीर: बच्चों का बाढ़ के पानी में गाड़ी लेकर चलना
सांकेतिक तस्वीर: बच्चों का बाढ़ के पानी में गाड़ी लेकर चलना फ़ोटो: Pexels

भारत में बाढ़ और सूखे का खतरा क्यों बढ़ा?

IIT रुड़की के अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि भारत के कई इलाकों में जलवायु परिवर्तन और अन्य कारकों के कारण बाढ़ और सूखे दोनों आपदाओं का खतरा बढ़ गया है।

2011 तक, देश के पांचवें हिस्से से अधिक जिले बाढ़ के प्रति, जबकि लगभग इतने ही जिले सूखे के प्रति संवेदनशील माने गए। अब एक साथ दोनों आपदाओं के प्रति संवेदनशील जिलों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। पूर्वी और उत्तरी भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड में यह प्रवृत्ति अधिक देखी गई है।

कौन-कौन से राज्य और जिले सबसे अधिक प्रभावित?

अध्ययन के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के अलावा ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और झारखंड के भी कई जिले बाढ़ और सूखे दोनों के प्रति संवेदनशील हैं।

  • पूर्वी और उत्तरी भारत के जिलों में बहु-आपदा हॉटस्पॉट बढ़े
  • हर 10 में से 1 से अधिक जिला उच्च जोखिम श्रेणी में
  • राज्य स्तर की तुलना में, जिला स्तर का आकलन अधिक सटीक माना गया

अध्ययन में कौन-कौन से आंकड़े और तरीके अपनाए गए?

IIT रुड़की ने 2001 और 2011 के बीच भारत के 591 जिलों के सामाजिक-आर्थिक, जनसांख्यिकीय और बुनियादी ढांचे से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया।

संस्थान ने ‘मल्टी-हैजर्ड वल्नरेबिलिटी इंडेक्स’ (एमएचवीआई) के आधार पर जिलों की संवेदनशीलता मापी। यह अध्ययन बताता है कि आपदा जोखिम का आकलन जिला स्तर पर करने से वास्तविक खतरों की बेहतर पहचान संभव है।

आम लोगों पर क्या असर होगा?

बाढ़ और सूखे का खतरा एक साथ बढ़ने से प्रभावित जिलों में खेती, जल आपूर्ति और आजीविका पर असर पड़ सकता है।

कई जगहों पर किसान एक ही मौसम में बाढ़ और सूखे की परेशानी झेल सकते हैं, जिससे फसलें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती हैं। इस कारण, इन जिलों में आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूल रणनीतियों की आवश्यकता बढ़ गई है।

आपके लिए इसका क्या मतलब है

अगर आप प्रभावित जिलों में रहते हैं, तो बाढ़ और सूखे दोनों के प्रति सतर्क रहना जरूरी है। खेती, पानी की योजना और आपदा तैयारी में स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।

सरकारी योजनाओं और राहत कार्यों की जानकारी रखें। आगे, केंद्र और राज्य सरकारें जिला स्तर पर दीर्घकालिक रणनीति बना सकती हैं, जिससे आम नागरिकों को राहत मिल सकेगी।

अगर आप अन्य राज्यों में हैं, तो भी जलवायु परिवर्तन के असर को समझना और स्थानीय आपदा तैयारियों पर ध्यान देना फायदेमंद रहेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भारत में बाढ़ और सूखे का खतरा किन राज्यों में सबसे अधिक है?

IIT रुड़की के अध्ययन के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के कई जिले सबसे अधिक संवेदनशील पाए गए हैं।

IIT रुड़की का अध्ययन किस आधार पर किया गया?

अध्ययन में 2001 और 2011 के बीच 591 जिलों के सामाजिक-आर्थिक, जनसांख्यिकीय और बुनियादी ढांचे से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।

इस अध्ययन का आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?

बाढ़ और सूखे के खतरे से खेती, आजीविका और जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की योजनाओं का महत्व बढ़ जाता है।

IIT रुड़की के इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानने के लिए Business Standard की रिपोर्ट देख सकते हैं।

अगर आप ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और राहत कार्यों की ताजा जानकारी चाहते हैं, तो आप ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की खबर पढ़ सकते हैं।

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Akshay

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